by Neema Joshua | 15 मई 2020 08:46 अपराह्न05
कई बार हमें घमण्ड इस बात से होता है कि हम सोचते हैं कि यह शरीर हमारा है। लेकिन यदि हम गहराई से सोचें, तो हमें समझ में आएगा कि इस शरीर पर हमारा पूर्ण अधिकार नहीं है। यह प्रमाण है कि यह शरीर हमारा नहीं, बल्कि किसी और का है।
यदि शरीर सचमुच तुम्हारा होता, तो तुम अपनी ऊँचाई, रंग या लिंग स्वयं चुन सकते। तुम यह भी तय कर सकते कि कब दिल धड़कना बन्द करे, या कब रक्त शरीर में बहना रुक जाए। तुम चाहे तो गर्मी में पसीना आने से रोक सकते। परन्तु चूँकि इनमें से कुछ भी तुम्हारे बस में नहीं है, यह सिद्ध करता है कि यह शरीर किसी और का है। बाइबिल कहती है:
“क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारा शरीर पवित्र आत्मा का मन्दिर है, जो तुम में है, और जिसे तुमने परमेश्वर से पाया है? और तुम अपने नहीं हो।”
— 1 कुरिन्थियों 6:19
इसीलिए हमें उसी के नियमों के अधीन जीना चाहिए। यदि वह कहता है कि शरीर पाप का साधन न बने, तो हमें मानना होगा क्योंकि यह हमारा नहीं है। यदि वह कहता है कि इसे व्यभिचार, शराबखोरी या अशुद्धता के लिए प्रयोग न करो, तो हमें मानना होगा क्योंकि यह उसका है। हम केवल किरायेदार हैं इस शरीर में।
मसीह का उत्तर: “परमेश्वर को उसका दो”
कभी फरीसियों ने यीशु से पूछा:
“तो हमें बता, तेरा क्या विचार है? क्या कैसर को कर देना उचित है या नहीं?” यीशु ने उनकी कपटता जानकर कहा, “मुझे कर का सिक्का दिखाओ।” उन्होंने एक दीनार लाकर दिया। यीशु ने उनसे कहा, “यह छवि और लेख किसका है?” उन्होंने कहा, “कैसर का।” तब उसने उनसे कहा, “तो जो कैसर का है, कैसर को दो; और जो परमेश्वर का है, परमेश्वर को दो।”
— मत्ती 22:17–21
यहाँ सवाल है, “जो परमेश्वर का है” वह क्या है? केवल धन-दौलत या दशमांश ही नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक।
हम परमेश्वर की छवि में बने हैं
शुरुआत में लिखा है:
“फिर परमेश्वर ने कहा, आओ, हम मनुष्य को अपने स्वरूप और अपनी समानता में बनाएँ, और वे समुद्र की मछलियों, आकाश के पक्षियों, पशुओं, सारी पृथ्वी और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर प्रभुत्व करें। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में उत्पन्न किया; परमेश्वर के स्वरूप में उसने उसे उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने उनको उत्पन्न किया।”
— उत्पत्ति 1:26–27
तो जो परमेश्वर का है, वह हमारा शरीर है, क्योंकि उसमें उसकी सूरत और समानता है। जैसे सिक्के पर कैसर की छवि होने के कारण उसे कैसर को लौटाना चाहिए, वैसे ही हमारे शरीर पर परमेश्वर की छवि है, इसलिए हमें अपने शरीर को परमेश्वर को अर्पित करना चाहिए।
आत्म-परीक्षण
अब प्रश्न है: क्या हम अपने शरीर को वैसे रखते हैं जैसे परमेश्वर चाहता है?
क्या हम इसे पवित्र रखते हैं?
क्या हम इसे उपवास और प्रार्थना में लगाते हैं?
क्या हम इसे आराधना-गृह में ले जाते हैं?
यदि नहीं, और जब प्रार्थना का समय आता है तब हम कहते हैं “थके हुए हैं,” या उपवास का समय आए तो “बीमार हैं,” तो याद रखो, एक दिन उस शरीर के मालिक के सामने हमें उत्तर देना होगा।
यदि तुम इस शरीर को व्यभिचार या पाप में लगाते हो, यदि इसे नग्नता, घमण्ड, गर्भपात या अपवित्रता के लिए प्रयोग करते हो—तो गम्भीरता से सोचो। शरीर तुम्हारा नहीं है।
“इसलिए, भाइयो, मैं परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर तुम्हें विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भानेवाला बलिदान करके अर्पित करो; यही तुम्हारी आत्मिक उपासना है।”
— रोमियो 12:1
प्रभु हमें सदा सहायता करे।
शालोम।
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