“‘पर मुझे एक बपतिस्मा लेना है’ (लूका 12:50) — यीशु का असली अर्थ क्या था?”

by Ester yusufu | 23 जून 2022 08:46 अपराह्न06

1. लूका 12:50 का संदर्भ और आशय

यीशु ने कहा:

“मुझे तो एक बपतिस्मा लेना है; और जब तक वह न हो ले तब तक मैं कैसी सकेती में रहूंगा?”
लूका 12:50 (हिंदी बाइबल) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)

यहाँ यीशु पानी के बपतिस्मा की बात नहीं कर रहे — क्योंकि उनका पानी का बपतिस्मा तो उनके सेवाकाल की शुरुआत में पहले ही हुआ था। (Hindi Bible)

उन्होंने अपनी दुखों, क्रूस की पीड़ा और उस कठिन मिशन के बारे में बात की, जो वे पूरी दुनिया के उद्धार के लिए सहने वाले थे। “बपतिस्मा” शब्द, जिसका मूल अर्थ पूरी तरह डूबना या डुबो देना होता है, से वे अपने दुख और मृत्यु की पूरी तरह डुबो जाने वाले अनुभव का संकेत दे रहे हैं — एक प्रकार से मृत्यु को अपनाने का गहरा अर्थ।


2. क्रूस का बपतिस्मा: मृत्यु, समाधि और पुनरुत्थान

यीशु की मृत्यु केवल एक दुख या बलिदान नहीं थी — यह हमारी ओर से मृत्यु माध्यम से प्रायश्चित करना था। उन्होंने हमारी पापों का बोझ उठाया और उस पाप को अपनी मृत्यु, समाधि और पुनरुत्थान के मार्ग से हराया। इसका अर्थ यह है कि वे मृत्यु के काले अंधेरे में चले गए ताकि हम जीवन के उजाले में चल सकें।

“हम उसका मृत्यु का बपतिस्मा पाकर उसके साथ गाड़े गए…”

रोमियों 6:4 (हिंदी बाइबल) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)

यह पद बताता है कि उनके साथ हमारे जुड़ने का अर्थ है उनके मृत्यु और पुनरुत्थान में भागीदारी — एक आध्यात्मिक जीवनात्रा की शुरुआत।


3. जल बपतिस्मा द्वारा हमारी पहचान

हम जब पानी में बपतिस्मा लेते हैं, तो यह केवल एक प्रतीकात्मक क्रिया नहीं होती। यह दर्शाता है कि हम:

“…पतन करो, और प्रत्येक तुम्हारे में से यीशु मसीह के नाम पर पापों के क्षमाप्राप्ति के लिए बपतिस्मा ले, और तुम पवित्र आत्मा का उपहार पाने वाले हो।”
प्रेरितों के काम 2:38 (हिंदी बाइबल) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)

बपतिस्मा में हमारा यह आत्म‑समर्पण, यीशु की मृत्यु और जीवन में हमारी पहचान को जगज़ाहिर करता है।


4. बपतिस्मा के बाद की आध्यात्मिक वास्तविकता

बपतिस्मा के माध्यम से हम एक नए आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करते हैं — न केवल बाहरी रूप से, बल्कि भीतर से बदलकर

बपतिस्मा के बाद, हम आध्यात्मिक रूप से मसीह में नए निर्माण का जीवन पाते हैं, जो हमें पिछले पापों से ऊपर उठने की शक्ति देता है। यह दर्शाता है कि अब हमारा जीवन पुरानी प्रकृति से निकलकर एक नई शुरुआत में बदल गया है, जो यीशु के पुनरुत्थान की शक्ति से जीता है।


5. “पानी और आत्मा से जन्म” की अनिवार्यता

यीशु ने यह भी स्पष्ट कहा:

“मैं तुमसे सच्ची सच्ची कहता हूँ, यदि कोई पानी और आत्मा से जन्म न ले, वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश न कर सके.”
यूहन्ना 3:5 (हिंदी बाइबल) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)

यह स्पष्ट रूप से बताता है कि истинिक पुनर्जन्म — अर्थात बपतिस्मा के अनुभव के साथ पवित्र आत्मा को प्राप्त करना — परमेश्वर के राज्य में प्रवेश के लिए आवश्यक है।


6. निष्कर्ष — यीशु का बपतिस्मा क्या था?

जब यीशु ने कहा:

“मुझे एक बपतिस्मा लेना है…”,

तो वे अपने भविष्य के दुखों, क्रूस पर चढ़ने, मृत्यु, समाधि और पुनरुत्थान की ओर इशारा कर रहे थे — वह पूरी प्रक्रिया जो सुसमाचार का मूल है। यह उनके लिए एक गहरा, दर्दनाक लेकिन आवश्यक मिशन था, जो उन्होंने पूरी दुनिया के उद्धार के लिए पूरा किया।

इसलिए आज हमारा जल बपतिस्मा सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं है — यह यीशु के क्रूस और पुनरुत्थान में हमारी व्यक्तिगत भागीदारी का सार्वजनिक और आध्यात्मिक रूप से परिवर्तनकारी अनुभव है।

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