1 कुरिन्थियों 3:15 को समझना —

by Salome Kalitas | 7 मार्च 2022 08:46 अपराह्न03

यह रहा आपका कंटेंट स्वाभाविक, शुद्ध और मूल हिंदी वक्ता की शैली में अनुवादित, जिसमें बाइबल पद ठीक तरह से उद्धृत किए गए हैं और धार्मिक अर्थ सुरक्षित रखा गया है:


“वह स्वयं तो उद्धार पाएगा, परन्तु जैसे आग में से होकर”

1 कुरिन्थियों 3:15 को समझना — “वह स्वयं तो उद्धार पाएगा, परन्तु जैसे आग में से होकर”

1 कुरिन्थियों 3:11–15

11 क्योंकि कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता, सिवाय उस नींव के जो पहले से डाली गई है, अर्थात् यीशु मसीह।
12 यदि कोई इस नींव पर सोना, चाँदी, बहुमूल्य पत्थर, लकड़ी, घास या भूसा लगाए,
13 तो हर एक का काम प्रकट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे स्पष्ट कर देगा। वह आग के द्वारा प्रकट किया जाएगा, और वह आग हर एक के काम की जाँच करेगी कि वह कैसा है।
14 यदि किसी का बनाया हुआ काम बना रहेगा, तो उसे प्रतिफल मिलेगा।
15 यदि किसी का काम जल जाएगा, तो उसे हानि होगी; तौभी वह स्वयं तो उद्धार पाएगा, परन्तु जैसे आग में से होकर।


1. पवित्रशास्त्र में न्याय के दो मुख्य प्रकार

A. दुष्टों (अविश्वासियों) का न्याय

B. धर्मियों (विश्वासियों) का न्याय

यही 1 कुरिन्थियों 3:13–15 का संदर्भ है। पौलुस उन विश्वासियों से बात कर रहा है जिनका उद्धार सुरक्षित है, परन्तु जिनके कामों की जाँच अनन्त प्रतिफल के लिए की जाएगी।


2. 1 कुरिन्थियों 3 में “आग” का अर्थ

यहाँ “आग” शाब्दिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक है। यह परमेश्वर की पवित्र जाँच और न्याय को दर्शाती है, विशेषकर उसके वचन और धार्मिकता के द्वारा।


3. “उद्धार पाएगा, परन्तु जैसे आग में से होकर” — इसका अर्थ क्या है?

पौलुस यहाँ विश्वासियों के बारे में बोल रहा है। वह कहता है कि यदि किसी की सेवा या काम परीक्षा में असफल भी हो जाए, तब भी वह व्यक्ति उद्धार पाएगा — परन्तु बिना प्रतिफल के

यह पद पर्गेटरी (शुद्धिकरण स्थान) की शिक्षा का समर्थन नहीं करता।


4. धार्मिक दृष्टिकोण: सेवा में उत्तरदायित्व

परमेश्वर हर मसीही को उत्तरदायी ठहराएगा — विशेषकर शिक्षकों, पास्टरों और सेवकों को — कि उन्होंने उसके वचन को कैसे सिखाया और उसकी प्रजा का मार्गदर्शन कैसे किया।


5. आप क्या बना रहे हैं?

पौलुस निर्माण की उपमा देता है। मसीह ही एकमात्र सच्ची नींव है, परन्तु हम यह चुनते हैं कि उस पर कैसे निर्माण करें।


अंतिम विचार:

यह वचन —
“वह स्वयं तो उद्धार पाएगा, परन्तु जैसे आग में से होकर”
हमें स्मरण दिलाता है कि उद्धार अनुग्रह से है, परन्तु प्रतिफल विश्वासयोग्यता पर आधारित हैं
आइए हम केवल स्वर्ग में प्रवेश से संतुष्ट न हों, बल्कि यह सुनने का लक्ष्य रखें:
“शाबाश, अच्छे और विश्वासयोग्य दास” (मत्ती 25:21)।

मरानाथा — प्रभु शीघ्र आ रहा है।


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