जब यीशु को “सनातन का पुत्र” कहा जाता है, तो इसका क्या मतलब है?

जब यीशु को “सनातन का पुत्र” कहा जाता है, तो इसका क्या मतलब है?

“सनातन” का अर्थ है—जिसका न कोई आरंभ है और न कोई अंत; जो हमेशा से अस्तित्व में है।

जब हम कहते हैं कि यीशु सनातन परमेश्वर के पुत्र हैं, तो इसका मतलब है कि यीशु ऐसे परमेश्वर के पुत्र हैं जिनका कोई आरंभ नहीं है; वे हमेशा से हैं। यह सत्य ईसाई विश्वास का मूल है और हमें बताता है कि यीशु पूरी तरह से परमेश्वर हैं।

यह विचार अक्सर नाइसिन क्रीड में व्यक्त किया जाता है, जो 325 ईस्वी में नाइसिया की परिषद में चर्च के नेताओं द्वारा बनाया गया एक आधारभूत ईसाई विश्वास घोषणापत्र है। क्रीड इस बात को स्पष्ट रूप से बताता है कि यीशु कौन हैं और ईसाइयों को दुनिया भर में एकजुट करता है।

नाइसिन क्रीड में लिखा है:

“हम एक परमेश्वर में विश्वास करते हैं, सर्वशक्तिमान पिता में, जिसने आकाश और पृथ्वी और सभी दृश्यमान और अदृश्य चीजें बनाई।
हम एक प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करते हैं, परमेश्वर के एकमात्र पुत्र में, जो पिता से अनंतकाल से उत्पन्न हुआ, परमेश्वर से परमेश्वर, प्रकाश से प्रकाश, सच्चे परमेश्वर से सच्चा परमेश्वर; उत्पन्न हुआ, बनाया नहीं गया, पिता के साथ एक स्वरूप में। उसके द्वारा सब कुछ बनाया गया।
हमारे और हमारे उद्धार के लिए वह स्वर्ग से उतरे, पवित्र आत्मा से मरियम में शरीर धारण किया और मनुष्य बने।
पोंटियस पिलातुस के अधीन हमारे लिए क्रूस पर चढ़ाए गए; उन्होंने पीड़ा सहन की और दफन किए गए।
तीसरे दिन शास्त्रों के अनुसार वे पुनर्जीवित हुए;
वे स्वर्ग में चढ़े और पिता के दाहिने हाथ पर विराजमान हैं।
वे फिर महिमा के साथ आएंगे, जीवितों और मृतों का न्याय करेंगे, और उनका राज्य कभी समाप्त नहीं होगा।”


क्या यीशु वास्तव में सनातन परमेश्वर के पुत्र हैं?

हाँ। बाइबल स्पष्ट रूप से बताती है कि यीशु का कोई आरंभ और कोई अंत नहीं है। इब्रानियों 7:3 (Hindi Bible) में लिखा है:

“उनमें पिता और माता नहीं, और न ही वंशावली है; उनके दिनों की कोई गिनती नहीं, और जीवन का कोई अंत नहीं; और परमेश्वर के पुत्र के समान वे हमेशा याजक बने रहते हैं।”

इसका अर्थ है कि यीशु शाश्वत हैं—वे किसी भी मनुष्य की तरह नहीं हैं।


यीशु स्वयं परमेश्वर हैं (यूहन्ना 1:1,14)

“आदि में वचन था, वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था… और वचन मनुष्य बनकर हमारे बीच वास करने आया।”

यीशु कोई रचित प्राणी नहीं हैं; वे पूरी तरह से दिव्य हैं और पिता के बराबर हैं (यूहन्ना 10:30)

“मैं और पिता एक हैं।”

ईसाई धर्म सिखाता है कि परमेश्वर एक हैं, लेकिन तीन व्यक्तियों में शाश्वत रूप से मौजूद हैं: पिता, पुत्र (यीशु), और पवित्र आत्मा (मत्ती 28:19)। यह तीन देवताओं का सिद्धांत नहीं है, बल्कि एक परमेश्वर जो तीन व्यक्तियों में हैं।


यीशु का उद्देश्य

यीशु पृथ्वी पर हमारे पास परमेश्वर को प्रकट करने और हमें बचाने के लिए आए। वे हमें यह दिखाना चाहते हैं कि हम परमेश्वर के सच्चे बच्चे कैसे बन सकते हैं (यूहन्ना 14:6)

“मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ। मेरे द्वारा ही कोई पिता के पास आता है।”

ईश्वर आपको आशीर्वाद दें, ताकि आप समझ सकें कि यीशु वास्तव में कौन हैं।

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Ester yusufu editor

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