यह पत्र उन मसीहियों को लिखा गया था जो एशिया माइनर (आज के तुर्की) के विभिन्न इलाकों में बिखरे हुए थे और परदेशी (अतिथि) जीवन जी रहे थे।
पत्र में चार मुख्य विषय हैं:
विश्वासियों को दिलासा देना उन्हें यह याद दिलाना कि स्वर्ग में उनके लिए एक अनंत महिमा सुरक्षित है, और यह कि अंतिम दिन में वह महिमा खुलकर सामने आएगी। इसी आशा के चलते वे आज की परेशानियों और विश्वास की परीक्षाओं में भी खुशी पा सकते हैं।
पवित्र जीवन का आह्वान पतरस उन्हें अपने सांसारिक जीवन में आत्म-संयम और पवित्रता के साथ जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
गैर-मसीहियों के बीच आचरण विश्वासियों को अनुशासन, ईमानदारी और अनुचित आरोपों से बचते हुए जीने का आग्रह है, ताकि उनका जीवन परमेश्वर का सम्मान बढ़ाए।
चर्च नेताओं के लिए जिम्मेदारी चर्च के प्राचीनों (लीडरों) को मसीह की भेड़ियों की देखभाल निष्ठा और सेवा की भावना से करने का निर्देश देना, और पूरे विश्वासियों को शैतान के विरोध में जागरूक रहकर खड़ा रहने का संदेश देना।
पतरस कहते हैं कि उनकी पीड़ा और परीक्षण सिर्फ अस्थायी हैं, और उनका विश्वास बहुत कीमती है जैसे आग में तपाकर खरा किया गया सोना:
“…यद्यपि अब कुछ दिन के लिए तुम विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में दुःख सहो; यह इसलिए है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास नाशवान सोने से भी कहीं अधिक मूल्यवान मसीह के प्रकट होने पर स्तुति, महिमा और सम्मान का कारण बने।” 1 पतरस 1:6‑7 (OV‑BSI) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)
वे मसीह की मिसाल देते हैं, जिन्होंने अन्याय सहा लेकिन प्रतिशोध नहीं लिया। इसी तरह हमें भी नम्रता, धैर्य और सहनशीलता से दुखों का सामना करना है।
चूंकि मसीह के लौटने पर उन्हें कृपा मिलेगी, पतरस आग्रह करते हैं कि इस जीवन में भी वे पवित्र और संयमित बनें:
“इसलिए अपना दिमाग सजग और पूरी तरह से संयमित रखो, और मसीह के आने पर तुम्हें मिलने वाली कृपा में आशा लगाओ। आज्ञाकारिता के बच्चों की तरह, उन बुरी इच्छाओं में न लौटो, जिन्हें तुम अज्ञानता में रखते थे; पर जैसा जिसने तुम्हें बुलाया है वह पवित्र है, उसी तरह तुम भी अपनी सारी चाल-चलन में पवित्र बनो।” 1 पतरस 1:13‑16 (CL‑BSI) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)
इसके बाद वे बताते हैं कि हमें क्या करना चाहिए:
ईर्ष्या, कपट, धोखा, दोषारोपण आदि बुराइयों को त्यागना (1 पतरस 2:1–2)
इस संसार को परदेशी की तरह देखना और आत्मा के विरुद्ध अवधारणाओं (पापी इच्छाओं) से बचना (1 पतरस 2:11; 4:2–3)
गहराई से एक दूसरे से प्रेम करना, नम्रता और दया दिखाना, बुराई का बदला बुराई से न देना, बल्कि आशीर्वाद देना (1 पतरस 3:8–12; 4:7)
वैवाहिक जिम्मेदारियाँ निभाना: पत्नियाँ अपने पतियों के साथ आत्म‑सौंदर्य और नम्रता से व्यवहार करें, और पति अपनी पत्नियों का सम्मान और समझ के साथ ध्यान रखें (1 पतरस 3:1–7)
पतरस विश्वासियों को निर्देश देते हैं कि वे दुनिया के सामने अपना जीवन इस तरह पेश करें कि कोई उन्हें दोष देने का मौका न पाए:
दासों को अपने मालिकों के प्रति आज्ञाकारिता का पालन करना चाहिए, चाहे वे दयालु हों या कठोर (1 पतरस 2:18)
सभी श्रद्धालुों को धार्मिक कारणों से शासन‑प्राधिकरणों के सामने आज्ञाकारिता करनी चाहिए (1 पतरस 2:13–15)
सब लोगों के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए (1 पतरस 2:17)
पतरस विशेष रूप से चर्च के नेताओं (प्राचीनों) को संबोधित करते हैं, उन्हें मसीह की भेड़ियों की देखभाल के लिए प्रेरित करते और यह कहकर कि यह सेवा स्वेच्छा और सेवा की भावना से होनी चाहिए, न कि स्वार्थ से:
“मैं तुम में जो प्राचीन हो, उनसे आग्रह करता हूँ मैं भी उनमें से एक हूँ मसीह के दुःखों का गवाह और आने वाली महिमा का सहभागी: तुम परमेश्वर के झुंड की देखभाल करो, न अवश्यकता से, बल्कि स्वेच्छा से; न अनुचित लाभ के लिए, बल्कि सेवा की प्रेरणा से; न प्रभुत्व जताने के लिए, बल्कि झुंड के लिए आदर्श बनकर।” 1 पतरस 5:1‑3 (CL‑BSI) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)
और अंत में, सभी को चेतावनी देते हैं कि वे सजग और संयमित रहें क्योंकि शैतान “गरजते हुए शेर” की तरह भटकता है:
“होश में रहो, जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गरजनेवाले सिंह की तरह भटकता है, यह देखऩे में कि किसे खा जाए। विश्वास में दृढ़ रहो, और जान कर कि तुम्हारे जैसे भाइयों को भी संसार में वही दुख झेलना पड़ता है।” 1 पतरस 5:8‑9 (CL‑BSI) (YouVersion | The Bible App | Bible.com)
पतरस हमें इन बातों के लिए प्रेरित करते हैं:विश्वास में दृढ़ता बनाए रखें और परीक्षाओं का धैर्यपूर्वक सामना करें।
पवित्रता का पीछा करें और लोगों के सामने निर्दोष व्यवहार करें।
प्रेम, सेवा, नम्रता और आज्ञाकारिता में जीवन जिएँ।
चर्च की देखभाल निष्ठा से करें और शैतान का विरोध करें।
यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पतरस के समय में था।
कुछ आत्म‑परिवर्तन के प्रश्न:
क्या आप कठिनाइयों में भी आनन्द पा रहे हैं?
क्या आपका जीवन पवित्रता का प्रतिबिंब देता है?
क्या आपकी समुदाय में मसीह की झलक मिलती है?
क्या आप परमेश्वर की सेवा करते हुए शैतान का लगातार विरोध कर रहे हैं?
यदि हाँ, तो आप परमेश्वर की महान कृपा में भागीदार हैं, जो मसीह के लौटने पर पूरी तरह प्रकट होगी।
भगवान आपको आशीर्वाद दे
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