प्राचीन समय में लोग घंटे, मिनट और सेकंड कैसे जानते थे?

प्राचीन समय में लोग घंटे, मिनट और सेकंड कैसे जानते थे?

प्रश्न: आज हम घड़ियों (दीवार घड़ी, कलाई घड़ी या मोबाइल फोन) का उपयोग करके सेकंड, मिनट और घंटे जानते हैं। लेकिन पहले के समय में, जब ऐसी आधुनिक घड़ियाँ नहीं थीं, तब लोग समय कैसे जानते थे?

उत्तर: बाइबिल के समय, दिन को 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात के रूप में बाँटा जाता था। यीशु ने भी इसी सिद्धांत का उल्लेख किया है जब उन्होंने कहा:

“यीशु ने उत्तर दिया, ‘क्या दिन में बारह घंटे नहीं हैं? जो कोई दिन में चलता है, वह ठोकर नहीं खाता, क्योंकि वह इस जगत के प्रकाश को देखता है। पर जो रात में चलता है वह ठोकर खाता है, क्योंकि प्रकाश उसके भीतर नहीं है।’”
यूहन्ना 11:9–10 (Hindi ERV)

इस बात से स्पष्ट है कि उस समय लोग दिनों को घंटों में बाँटते और समझते थे। लेकिन बाइबिल में कहीं यह उल्लेख नहीं मिलता कि प्राचीन लोग घंटों को मिनट या सेकंड में बाँटते थे जैसा कि हम आज करते हैं। यानी सेकंड की गिनती उस समय मौजूद नहीं थी।

तो सवाल यह बनता है:
वे कैसे जानते थे कि एक घंटा पूरा हो गया और अगला शुरू हो गया — ताकि वे दिन और रात के सभी 12‑12 घंटे गिन सकें — बिना आधुनिक घड़ियों के?

पुराने समय में लोग आधुनिक कलाई घड़ियाँ नहीं इस्तेमाल करते थे। वे सीधे प्राकृतिक संकेतों और सरल समय‑मापक विधियों का उपयोग करते थे। इन तरीकों में सूर्य को देखना, छाया की दिशा, पानी की घड़ियाँ, बालू‑घड़ियाँ और तारे तथा नक्षत्रों का निरीक्षण शामिल था।


1. सूर्य को देखकर समय जानना

जब सूरज उगता था, तो वे जानते थे कि दिन का पहला घंटा शुरू हो गया है। जब सूरज सीधा ऊपर होता था, तो वह छठा घंटा (लगभग दोपहर) माना जाता था। सूर्यास्त तक वे जानते थे कि दिन का बारहवां घंटा पूरा हो चुका है। इस तरह वे बीच के घंटों का अंदाजा लगा लेते थे।


2. सूर्य की छाया से समय मापना (Sundial)

सूर्य की छाया की लंबाई और दिशा देखकर लोग समय का अनुमान लगाते थे। यह वही विधि है जिसका उल्लेख बाइबिल में है, जैसे राजा हिजकिय्याह के समय जब सूर्य घड़ी की छाया पीछे की ओर चली गई (यशायाह 38:8) — जो सूर्य की छाया पर आधारित समय‑निर्धारण का उदाहरण है।


3. जलघड़ी (Water Clock)

रात में, जब सूर्य नहीं दिखता था, तब लोग जलघड़ियों का उपयोग करते थे। पानी एक पात्र से धीरे‑धीरे दूसरे में टपकता था, और पानी का स्तर यह बताता था कि कितना समय बीत चुका है। इस प्रकार का समय‑मापन बाबेल (बाबुल) में बहुत प्रचलित था।


4. बालू‑घड़ी (Sand Clock)

बालू‑घड़ी में बालू को एक पात्र से दूसरे पात्र में समान रूप से गिरने दिया जाता था। इससे भी समय के बीतने का अंदाजा लगाया जाता था।


5. तारे और नक्षत्रों से समय जानना

रात में लोग तारों और नक्षत्रों की स्थिति को देखकर समय का अनुमान लगा लेते थे। अलग‑अलग नक्षत्र रात के अलग‑अलग समय पर दिखाई देते थे, जिससे लोग रात के घंटों को पहचानते थे।


संक्षेप में:
बाइबिल के समय लोग मुख्य रूप से सूर्य, छाया और सरल उपकरणों का उपयोग करके दिन को घंटों में बाँटते थे। आज की तरह सेकंड गिनने की प्रणाली तब नहीं थी।

 

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Doreen Kajulu editor

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