“जब मैं बच्चा था तो मैं बच्चे की तरह बोलता था, बच्चे की तरह सोचता था, और बच्चे की तरह समझता था। लेकिन जब मैं बड़ा हो गया तो मैंने बचपन की बातों को छोड़ दिया।”
(1 कुरिन्थियों 13:11)
मसीह में बढ़ना केवल समय के साथ नहीं होता—हमारी समझ, हमारी सोच, और हमारे निर्णय भी परिपक्व होने चाहिए। आज बहुत से लोग क्रूस के सुसमाचार को अच्छी तरह जानते हैं—जो बताता है कि परमेश्वर यीशु के द्वारा पापियों को कैसे बचाता है। लेकिन बाइबल एक और सुसमाचार का भी उल्लेख करती है—अनन्तकालीन सुसमाचार, जो परमेश्वर के न्याय को घोषित करता है और सारी मानवता को उसकी आराधना के लिए बुलाता है।
ये दोनों सुसमाचार परमेश्वर की योजना में अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं।
1. क्रूस का सुसमाचार – उद्धार का संदेश
यह सुसमाचार यीशु मसीह की मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान पर आधारित है। यह पापी मनुष्य के लिए परमेश्वर के अनुग्रह का उपहार है—उद्धार का मार्ग।
यूहन्ना 14:6 (ERV)
“यीशु ने उससे कहा, ‘मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ। मेरे द्वारा किए बिना कोई पिता के पास नहीं आता।’”
1 कुरिन्थियों 1:18 (ERV)
“क्योंकि जो लोग नष्ट हो रहे हैं उनके लिये तो मसीह के क्रूस का सन्देश मूर्खता है, परन्तु हम जैसे लोग जो बचाये जा रहे हैं, उसके लिये वह परमेश्वर की शक्ति है।”
पौलुस ने चेतावनी दी थी कि सच्चे सुसमाचार के अतिरिक्त किसी और सुसमाचार को स्वीकार न करें।
2 कुरिन्थियों 11:4 (ERV)
“यदि कोई आकर तुम्हें कोई दूसरा यीशु सुनाए… या कोई दूसरा सुसमाचार दे… तो तुम आसानी से उसकी बात मान लोगे!”
क्रूस का सुसमाचार मनुष्यों के द्वारा प्रचारित किया जाता है—प्रचारक, पास्टर, मिशनरी और हर विश्वासी के द्वारा।
रोमियों 10:14–15 (ERV)
“वे सुनेंगे कैसे यदि कोई उन्हें सुनाने वाला न हो? और कोई सुनाएगा कैसे जब तक उसे भेजा न जाए?”
2. अनन्तकालीन सुसमाचार – अंत समय का सार्वभौमिक आह्वान
यह सुसमाचार प्रकाशितवाक्य 14:6–7 में मिलता है। यह मनुष्यों द्वारा नहीं, बल्कि एक स्वर्गदूत द्वारा घोषित किया जाता है—उस समय जब पृथ्वी पर अंतिम न्याय आने ही वाला होता है।
प्रकाशितवाक्य 14:6–7 (ERV)
“और मैंने एक और स्वर्गदूत को आकाश के बीच उड़ते देखा उसके पास पृथ्वी पर रहने वालों… को सुनाने के लिए अनन्तकालीन सुसमाचार था… वह ऊँचे शब्द से कह रहा था, ‘परमेश्वर से डरो और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय का समय आ पहुँचा है…’”
मुख्य बातें:
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प्राकृतिक प्रकाशन: यह सुसमाचार पूरी सृष्टि के आधार पर मनुष्य को सृष्टिकर्ता की ओर लौटने के लिए पुकारता है (रोमियों 1:20)।
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अंत समय का न्याय: यह बताता है कि परमेश्वर का न्याय आने वाला है—और मनुष्य को तुरंत उसके प्रति भय-भक्ति में झुकना चाहिए।
क्रूस का सुसमाचार उद्धार देता है।
अनन्तकालीन सुसमाचार चेतावनी देता है।
एक अनुग्रह का है, दूसरा न्याय का।
3. दोनों सुसमाचार – एक स्पष्ट तुलना
| पहलू |
क्रूस का सुसमाचार |
अनन्तकालीन सुसमाचार |
| संदेश |
मसीह पर विश्वास द्वारा उद्धार |
परमेश्वर का भय मानो; न्याय आ गया |
| प्रचारक |
मनुष्य (रोमियों 10:14–15) |
स्वर्गदूत (प्रकाशितवाक्य 14:6) |
| श्रोता |
वर्तमान काल—हर व्यक्ति |
अंत समय में पूरी दुनिया |
| केंद्र |
क्षमा, अनुग्रह, उद्धार |
आराधना, भय-भक्ति, न्याय |
| समय |
अनुग्रह का युग |
न्याय का युग |
4. जो लोग यीशु के बारे में कभी नहीं सुन पाए—उनका क्या?
बाइबल कहती है कि परमेश्वर स्वयं को हर व्यक्ति पर प्रकट करता है—सृष्टि, प्रकृति और अंतरात्मा के द्वारा।
रोमियों 1:19–20 (ERV)
“…परमेश्वर की जो बातें जानी जा सकती हैं वे उन्हीं में प्रकट हैं… ताकि वे निरुत्तर रहें।”
रोमियों 2:14–15 (ERV)
“…उनकी अंतरात्मा भी गवाही देती है और उनके विचार उन्हें दोषी ठहराते हैं…”
इसलिए कोई भी यह नहीं कह सकता कि उसने कभी परमेश्वर के बारे में नहीं जाना।
अनन्तकालीन सुसमाचार परमेश्वर के न्याय को पूरी तरह न्यायसंगत सिद्ध करता है।
5. परमेश्वर आपकी अंतरात्मा से बात करता है—इसे दबाएँ नहीं
जब हम पाप करते हैं, तो अंतरात्मा तुरंत चेतावनी देती है।
यह केवल सामाजिक नियम नहीं—यह परमेश्वर का आत्मा है जो हमें झकझोरता है।
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झूठ बोलते समय बेचैनी होती है।
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चोरी करते समय भीतर की आवाज़ रोकती है।
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यौन पाप में conscience कहता है, “यह गलत है।”
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उद्दंडता और अशुद्ध जीवन में शांति खो जाती है।
यूहन्ना 16:8 (ERV)
“और जब वह आएगा तो वह संसार के लोगों को उनके पापों… और आने वाले न्याय के विषय में दोषी ठहराएगा।”
जो बार-बार इसे दबाते हैं, उनके दिल कठोर हो जाते हैं।
रोमियों 1:28 (ERV)
“…परमेश्वर ने उन्हें उनके विकृत मन के हवाले कर दिया…”
6. अनुग्रह का द्वार अभी खुला है—लेकिन हमेशा नहीं रहेगा
आज हम अनुग्रह के युग में हैं — यह क्रूस का सुसमाचार सुनने और स्वीकार करने का समय है।
लेकिन जब कलीसिया उठा ली जाएगी, यह युग समाप्त हो जाएगा।
फिर संदेश बदल जाएगा—अनुग्रह का नहीं, न्याय का।
2 कुरिन्थियों 6:2 (ERV)
“अब अनुग्रह का समय है; आज उद्धार का दिन है।”
इब्रानियों 3:15 (ERV)
“आज यदि तुम उसकी आवाज़ सुनो, तो अपने मन को कठोर मत बनाओ।”
7. देर होने से पहले प्रभु की आवाज़ सुनो
परमेश्वर आज भी बोल रहा है—
अपने वचन के द्वारा,
आपकी अंतरात्मा के द्वारा,
और अपनी सृष्टि के द्वारा।
यदि आप उसकी आवाज़ को आज सुनकर झुक जाते हैं—उद्धार है।
यदि आप इसे अनदेखा करते हैं—आगे चलकर न्याय का सामना करना पड़ेगा।
रोमियों 10:9 (ERV)
“यदि तुम अपने मुँह से कहो कि ‘यीशु प्रभु है’ और अपने मन में विश्वास करो कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया—तो तुम्हारा उद्धार होगा।”
आज ही यीशु के पास आओ।
उनके प्रेम के कारण, उनके सत्य के कारण।
क्रूस का सुसमाचार तुम्हें जीवन देता है—
और अनन्तकालीन सुसमाचार चेतावनी देता है कि समय अब बहुत कम बचा है।
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