बाइबल में “राहाब” नाम दो बहुत अलग अर्थों में आता है:
ऐसा द्विअर्थी प्रयोग बाइबल में सामान्य है। जैसे “नाश करने वाला” शब्द कभी दैवी न्याय के दूत (निर्गमन 12:23) के लिए और कभी किसी सेना के लिए (यशायाह 16:4) इस्तेमाल होता है, उसी प्रकार “राहाब” भी व्यक्ति और राष्ट्र—दोनों के लिए प्रयुक्त होता है।
राहाब की कहानी यहोशू अध्याय 2 और 6 में वर्णित है। वह यरीहो में रहती थी और व्यभिचार का कार्य करती थी। फिर भी, उसके विश्वास और साहस ने उसे इस्राएल के इतिहास में एक अद्वितीय स्थान दिलाया।
उसने उन दो इस्राएली जासूसों को छुपाया, जो युद्ध से पहले नगर की जासूसी करने आए थे।
“…वे जाकर राहाब नाम की एक व्यभिचारिणी स्त्री के घर में पहुँचे और उसके घर में ठहरे।” (ERV-HI)
जब यरीहो के राजा को इसका पता चला, तो उसने राहाब को जासूसों को सौंपने का आदेश दिया।
“तब यरीहो के राजा ने राहाब के पास यह कहला भेजा, ‘जो लोग तेरे पास आए हैं, उन्हें निकाल ला…।’ परन्तु उस स्त्री ने उन दोनों पुरुषों को ले जाकर छिपा दिया…” (ERV-HI)
राहाब ने यह खतरा इसलिए उठाया क्योंकि उसने परमेश्वर की महिमा और शक्ति के बारे में सुना था—विशेषकर लाल समुद्र के विभाजन की घटना।
“…क्योंकि तुम्हारा यहोवा परमेश्वर ऊपर स्वर्ग में और नीचे पृथ्वी पर ईश्वर है।” (ERV-HI)
राहाब विश्वास द्वारा धर्मी ठहराए जाने (रोमियों 5:1) और अनुग्रह से उद्धार का अद्भुत उदाहरण है। चाहे वह विदेशी थी, और पापमय जीवन में थी—फिर भी उसका विश्वास उसे परमेश्वर के परिवार में ले आया, यहाँ तक कि वह यीशु मसीह की वंशावली में सम्मिलित हुई (मत्ती 1:5)।
“विश्वास से राहाब नाम की वह व्यभिचारिणी उन अविश्वासियों के साथ नाश नहीं हुई…” (ERV-HI)
“क्या राहाब व्यभिचारिणी भी दूतों को अपने यहाँ उतारकर और उन्हें दूसरे मार्ग से निकाल भेजकर कामों के द्वारा धर्मी नहीं ठहराई गई?… जैसे शरीर आत्मा के बिना मरा हुआ है, वैसे ही कामों के बिना विश्वास भी मरा हुआ है।” (ERV-HI)
राहाब का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्चा विश्वास कर्मों में प्रकट होता है—वह हमें परमेश्वर की ओर से खड़ा होने का साहस देता है।
भजन-संहिता, यशायाह और अय्यूब जैसे काव्यात्मक व भविष्यद्वाणी वाले ग्रंथों में “राहाब” मिस्र का रूपक है। यहाँ वह एक घमंडी समुद्री राक्षस की तरह दिखाया गया है—जो परमेश्वर का विरोध करता है, लेकिन अंततः परमेश्वर उसे चूर कर देता है।
“मिस्र की सहायता व्यर्थ और निष्फल है; इसलिए मैं ने उसे ‘राहाब जो चुपचाप बैठी है’ कहा है।” (ERV-HI)
“…क्या तू वही नहीं जिसने राहाब को टुकड़े–टुकड़े किया और अजगर को घायल किया?” (ERV-HI)
“तू ने राहाब को घायल करके मानो मार डाला हो…” (ERV-HI)
“वह अपनी शक्ति से समुद्र को वश में करता है… और अपनी समझ से वह अभिमानी को कुचल देता है।” (ERV-HI)
इस चित्रण के द्वारा बाइबल बताती है कि परमेश्वर किसी भी घमंडी राष्ट्र—चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो—के सामने सर्वोच्च है।
विश्वास जो जीवन बदल देता है**
राहाब का जीवन यह सिद्ध करता है कि:
“क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है… यह परमेश्वर का दान है; और कामों के कारण नहीं…” (ERV-HI)
“यीशु मसीह पर विश्वास करने से मिलने वाली परमेश्वर की धार्मिकता सब विश्वास करने वालों के लिये है…” (ERV-HI)
एक समय पाप में डूबी हुई राहाब, विश्वास और आज्ञाकारिता के कारण उद्धार पाई और मसीह के परिवार का हिस्सा बन गई। उसका जीवन परमेश्वर की दया और परिवर्तनकारी अनुग्रह का अद्भुत प्रमाण है।
चाहे “राहाब” एक स्त्री का नाम हो या मिस्र का प्रतीक—यह हमें एक सत्य की ओर इशारा करता है:
परमेश्वर न्यायी भी है—और अनुग्रह करने वाला भी।
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