जब बैल दाना चौड़ाता है तो उसके मुंह को बांधना नहीं चाहिए’ का क्या अर्थ है?” (व्यवस्था विवरण 25:4)

जब बैल दाना चौड़ाता है तो उसके मुंह को बांधना नहीं चाहिए’ का क्या अर्थ है?” (व्यवस्था विवरण 25:4)

यह वचन कहता है कि उस बैल का, जो खेत में दाना छानते समय काम कर रहा है, मुंह नहीं बांधा जाना चाहिए ताकि वह खेत के दाने से थोड़ी‑बहुत भूख मिटा सके। उस समय दाना छानने के लिए जानवर खेत के दानों पर चलते थे और दानों के कुछ हिस्से गिरते थे जो वे खा सकते थे। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वह बैल, जो मेहनत कर रहा है, उसके प्रयास का थोड़ा‑सा फल खाने को मिल सके।

यह आदेश केवल जानवरों के प्रति दया का प्रतीक नहीं है, बल्कि न्याय, करुणा और श्रम का सम्मान सिखाता है — जिस तरह बैल को काम करते समय इनाम मिलता है, वैसे ही लोगों को भी उनके परिश्रम का उचित पुरस्कार मिलना चाहिए।


बाइबिल का अर्थ और व्याख्या

1) धार्मिक अर्थ

ईश्वर ने यह आदेश दिया ताकि यह दिखाया जा सके कि जो मेहनत करता है, उसे उसका हिस्सा मिलना चाहिए और किसी भी काम में निष्पक्षता और दया होनी चाहिए। यह आदेश केवल जानवरों के लिए नहीं है, बल्कि मानव‑श्रम और समाज में निष्पक्ष व्यवहार के मूल सिद्धांत पर भी प्रकाश डालता है।


 नए नियम में इसका अनुप्रयोग

पौलुस ने 1 कुरिन्थियों 9:9‑14 में इसी वचन का उपयोग करते हुए बताया कि जो लोग सुसमाचार का प्रचार करते हैं, उन्हें उनके काम के लिए समर्थन होना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि जो लोग ईश्वर के काम में परिश्रम करते हैं — जैसे प्रेरित और सुसमाचार प्रचारक — उन्हें भी भौतिक रूप से सहायता प्राप्त होना चाहिए:

“मूसा की व्यवस्था में लिखा है — ‘जब बैल दाना चौड़ाता है तो उसके मुंह को मत बाँधो।’ … क्या यह बैलों के लिए कहा गया है? निश्चय ही यह हमारे लिये कहा गया है, क्योंकि जो खेत जोतता है वह आशा से जोतता है और जो दाना छानता है वह आशा से फसल पाने का भागीदार होता है।” (1 कुरिन्थियों 9:9‑10, हिन्दी बाइबिल Easy‑to‑Read)

पौलुस कहता है कि जैसे बैल अपनी मेहनत का हिस्सा खाता है, वैसे ही ईश्वर के काम में लगे लोगों को भी उनके काम का हिस्सा मिलना चाहिए


 क्यों ईश्वर ने यह आज्ञा दी?

ईश्वर की इच्छा थी कि न्याय और सहानुभूति का व्यवहार केवल उस समय न रहे जब यह आसान हो, बल्कि हर स्तर पर दिखे — यहाँ तक कि खेत में काम करने वाले जानवर तक के लिए। यदि इन जानवरों को इनाम दिया जाता है, तो मनुष्यों को तो और भी अधिक सम्मान और सहारा मिलना चाहिए


 अन्य सम्बन्धित बाइबिल सिद्धांत

बाइबिल में इन सत्यों को और स्पष्ट किया गया है:
1 तिमुथियुस 5:18 में लिखा है —

“क्योंकि वचन कहता है: ‘जब बैल दाना चौड़ाता है तो उसके मुंह को मत बाँधो,’ और ‘काम करनेवाला को उसके वेतन का अधिकारी माना जाना चाहिए।’”

यह मूल रूप से बताता है कि जो व्यक्ति मेहनत करता है वह अपने वेतन और सहायता का अधिकारी है


 सार — व्यावहारिक संदेश

जो काम करता है, उसे उसका न्यायोचित इनाम मिलना चाहिए।
ईश्वर की न्यायप्रियता केवल मनुष्यों के प्रति नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि के प्रति दिखती है।
हमारे समाज में भी श्रमिकों का सम्मान, उनका समर्थन और उनकी गरिमा का ध्यान होना आवश्यक है।


 निष्कर्ष

व्यवस्था विवरण 25:4 का आदेश सरल सा लगता है — बैल के मुँह को बांधने से रोकना — लेकिन इसका अर्थ अन्याय के विरुद्ध, दया के पक्ष में और काम का सम्मान करने का संदेश है। यह व्यक्ति‑व्यक्ति, समाज‑समाज और यहां तक कि ईश्वर‑मानव रिश्ते में भी लागू होता है।

 

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Doreen Kajulu editor

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