क्या मृतक वापस आ सकते हैं? लाजर, सैमुएल और Mediums की दुनिया पर धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण में परमेश्वर का नाम

क्या मृतक वापस आ सकते हैं? लाजर, सैमुएल और Mediums की दुनिया पर धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण में परमेश्वर का नाम

1. विषय का परिचय

लूका 16:27‑31 में यीशु ने एक कहानी कही जो मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में गहरा संदेश देती है। उस कहानी में एक धनी व्यक्ति अपने पिता अब्राहम से कहता है कि वह लाजर को अपने भाइयों के पास भेजे, ताकि वे इस दुख की स्थिति से बचने के लिए सचेत हो सकें। पिता अब्राहम जवाब देता है कि उनके पास पहले से “मूसा और भविष्यद्वक्ताओं के शब्द” हैं — उन्हें सुनना ही काफी है — और अगर वे उन्हें नहीं मानते, तो मृतकों की वापसी भी कुछ नहीं सुधार सकती। (संक्षेप रूप से बाइबिल दृष्टांत)

इसका मुख्य संदेश यह है:
मृत व्यक्ति वापस नहीं आते हैं — न बताने, न सिखाने, न चेतावनी देने के लिए।


2. सैमुएल और शाऊल की कहानी

1 सैमुएल 28 में राजा शाऊल उस समय की बात आती है जब उसने परमेश्वर की अनुमति के बिना एंडोर नाम की एक medium के पास जाकर मृत सैमुएल से संपर्क करने की कोशिश की।

Medium ने कहा उसने एक व्यक्ति देखा है जो ज़मीन में चला गया था और पुराने वस्त्र पहने हुए था — और शाऊल ने सोचा कि यह सैमुएल है।

यह घटना बड़ी चर्चाओं का विषय है, क्योंकि यदि सचमुच मृतक लौटते हैं, तो यह लूका में यीशु के कथन के विपरीत होगा — जहाँ स्पष्ट कहा गया है कि मृतक लौटकर जीवितों से बातचीत नहीं कर सकते।


3. बाइबिल स्पष्ट क्या कहती है?

बाइबिल एक अभेद्य पुस्तक है — उसमें कोई विरोधाभास नहीं। मृतकों के बारे में अलग‑अलग कथाएँ अलग मकसद से बताई गई हैं।

a) लूका में यीशु का दृष्टांत — असली शिक्षण

लूका 16 में यीशु का वह दृष्टांत न केवल एक कहानी है, बल्कि यह जीवन, मृत्यु और अनन्त परिणाम के बारे में एक धर्मशास्त्रीय मार्गदर्शन है। इसके मुख्य बिंदु हैं:

  • अच्छे और बुरे लोगों का मृत्यु के बाद अलग‑अलग भाग्य होगा।
  • मृतक वापस नहीं आते जीवित लोगों को चेतावनी देने या कुछ बताने के लिए।
  • परमेश्वर की शिक्षाएँ पवित्र शास्त्रों में हैं, न कि मृतकों की वापसी में।

यीशु ने यह सिद्धांत इसलिए स्पष्ट किया कि लोग परमेश्वर के वचनों को ही जीवन का मार्ग मानें — न कि अलौकिक कथाओं या medium‑जैसी प्रथाओं को।

b) 1 सैमुएल 28 — शाऊल का निर्णय

शाऊल ने medium की सहायता ली, लेकिन बाइबिल यह नहीं कहती कि वह वास्तव में सैमुएल से बोला, जैसा हमने देखा कि बाइबिल स्वयं स्पष्ट करती है कि यह प्रकार की प्रथाएँ परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप नहीं थीं।


4. बाइबिल की सिखावट

1) मृतक वापस नहीं आते

लूका के दृष्टांत में यह बिलकुल स्पष्ट है कि मृतक वापस नहीं आ सकते, चाहे कितना ही प्रयत्न किया जाए। किसी medium द्वारा «मृतकों की आवाज़ें» जैसा अनुभव हुआ हो, उसका अर्थ यह नहीं कि मृत आत्माएँ वाकई लौटकर सांस ले रही हैं या जीवितों से संवाद कर सकती हैं।

2) शाऊल की कहानी परमेश्वर का उद्देश्य नहीं

1 सैमुएल 28 में शाऊल की कहानी यह दिखाती है कि जब कोई व्यक्ति परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं करता, तब वह गलत स्रोतों की ओर चल सकता है — जैसे medium‑प्रथाएँ — जो **परमेश्वर की इच्छा नहीं हैं।**

3) आत्मा‑लोक अलग है

बाइबिल के अनुसार जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसकी आत्मा एक अलग, परमेश्वर‑नियंत्रित वास्तविकता में जाती है, जहाँ वह जीवितों से सीधे बातचीत नहीं करती।
बाइबिल कहीं भी यह नहीं कहती कि कोई मृत आत्मा अपने जीवन काल की तरह सक्रिय रूप से वापस आकर बातें करती है


5. चेतावनी और मार्गदर्शन

आज भी बहुत से लोग medium‑जैसी प्रथाओं का सहारा लेते हैं — चाहे वह मृतकों से बात करने की कोशिश हो या जादू‑टोना। बाइबिल इसे स्पष्ट रूप से गलत मार्ग कहती है। हमें परमेश्वर पर विश्वास करना चाहिए और उसके वचनों को जीवन में मानना चाहिए, न कि ऐसे अनुभवों पर भरोसा करना चाहिए जो सत्य बाइबिल शिक्षाओं से मेल नहीं खाते।


6. सार निष्कर्ष

  • लूका 16 में यीशु स्पष्ट कहते हैं कि मृतक वापस नहीं आते और बाइबिल ही जीवन के मार्ग का सच्चा स्रोत है।
  • 1 सैमुएल 28 में शाऊल ने medium से संपर्क किया, लेकिन यह परमेश्वर की इच्छा का भाग नहीं था
  • वास्तविक जीवन मार्ग विश्वास, पवित्र शास्त्रों का अध्ययन और परमेश्वर का अनुसरण है।

7. विश्वास और जीवन

बाइबिल कहती है कि यीशु मसीह ही जीवन का स्रोत हैं, जिन्होंने हमारे लिए मृत्यु को हराया। परमेश्वर के वचनों पर मजबूती से चलना ही जीवन का सही मार्ग है।

 

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Doreen Kajulu editor

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