यीशु कब क्रूस पर चढ़ाए गए थे?

यीशु कब क्रूस पर चढ़ाए गए थे?

यह विषय अक्सर लोगों के दिल में सवाल उठाता है क्योंकि मरकुस और यूहन्ना के सुसमाचार में समय बताने के तरीके में अंतर दिखता है। हम इसे सरल और स्पष्ट रूप से समझने की कोशिश करेंगे।


मरकुस 15:25 (Hindi Bible)

“और एक पहर दिन चढ़ा था, जब उन्होंने उस को क्रूस पर चढ़ाया।”
मरकुस 15:25

मरकुस के अनुसार, यीशु को तीसरे घंटे के समय (जो हमारी गिनती में लगभग सुबह 9 बजे) पर क्रूस पर चढ़ाया गया था।


यूहन्ना के सुसमाचार से समय विवरण

यूहन्ना लिखते हैं कि यह पास्का का दिन और छठा घंटा था जब यीशु का मुकदमा पिलातुस के सामने हुआ — अर्थात् लगभग दोपहर 12 बजे

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यहूदी समय और रोमन समय में घंटों की गिनती अलग‑अलग होती थी, इसलिए यह भिन्नता आती है।


लूका 23:44–46 (Hindi Bible)

लूका लिखते हैं:

“और जब छठा घंटा आने लगा, तो सारा देश अँधेरे में डूब गया, और नवाँ घंटा तक अँधेरा रहा। तब यीशु ने बड़े स्वर से कहा, ‘हे पिता! मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ।’ कहते ही उसने प्राण त्याग दिए।”
लूका 23:44–46

लूका के अनुसार, दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक अँधेरा रहा, और फिर यीशु क्रूस पर अपना जीवन त्याग दिया


समय को समझने का सरल तरीका

दो प्रणाली थीं जिनके अनुसार समय बताया गया:

 यहूदी समय (मार्को और लुका के अनुसार)

  • पहला घंटा = सुबह 6 बजे
  • तीसरा घंटा = सुबह 9 बजे
  • छठा घंटा = दोपहर 12 बजे
  • नवाँ घंटा = दोपहर 3 बजे

मार्को बताते हैं कि यीशु को सुबह 9 बजे (तीसरे घंटे) पर क्रूस पर चढ़ाया गया।
लूका बताते हैं कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक अँधेरा रहा और उसके बाद मृत्यु हुई।

 रोमन समय (यूहन्ना के अनुसार)

यूहन्ना शायद रोमन समय का उपयोग कर रहे हैं, जहां दिन की शुरुआत भोर में नहीं बल्कि पहले रोशनी में गिनी जाती थी, इसलिए छठा घंटा लगभग दोपहर 12 बजे आता है।


तो वास्तविक क्या था?

कोई विरोध नहीं है — बाइबल के लेखक एक ही घटना को अलग‑अलग समय प्रणाली से बता रहे हैं।
 मार्को, यूहन्ना और लूका सभी एक ही घटना बता रहे हैं — बस समय गिनने के तरीके में भिन्नता है।


इसके पीछे मुख्य बातें

  • यीशु को पास्का के दिन सूली पर चढ़ाया गया, जो ईसाइयों के लिए परमेश्वर की प्रेम योजना का मुख्य हिस्सा है।
  • लूका के अनुसार, अँधेरे और मृत्यु का विवरण दिखाता है कि इस घटना का कितना गहरा आध्यात्मिक महत्व है।
  • समय‑समय पर अलग‑अलग विवरण भगवान के वचन को और स्पष्ट नहीं, बल्कि स्थिति के अनुरूप होने की व्याख्या होते हैं।

 धार्मिक अर्थ

यीशु का क्रूस पर चढ़ना नहीं सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि यह हमारे पापों के लिए उद्धार का माध्यम है — इसलिए इसे क्रूस और इसके समय के बारे में बाइबिल में इतना विस्तृत वर्णन मिलता है।


 

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Doreen Kajulu editor

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