रोमियों 16:22
“मैं, टर्टियस, जिसने यह पत्र लिखा, तुम्हें प्रभु में नमस्कार करता हूँ।”
उत्तर: रोमियों की शुरुआत में पॉल स्पष्ट रूप से खुद को लेखक के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
रोमियों 1:1–7 में लिखा है:
“यह पत्र पौलुस की ओर से है, जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्वर के सुसमाचार के लिये अलग किया गया है… उन सब के नाम, जो रोम में परमेश्वर के प्यारे हैं और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं। हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले।”
यह स्पष्ट करता है कि पौलुस (Paul) ही इस पत्र के मुख्य लेखक हैं, जिनके शब्द, विचार और धार्मिक व्याख्याएँ पूरी पुस्तक में मिलती हैं।
तो फिर टर्टियस का नाम रोमियों के अंत में क्यों लिखा है?
रोमियों 16:22 में टर्टियस लिखते हैं कि उन्होंने यह पत्र लिखा है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे पत्र के विचारों के लेखक हैं। वे उस समय के सामान्य लेखन‑प्रथा के अनुसार पौलुस के शब्दों को लिखने वाले सह‑लेखक या ‘स्क्राइब’ (scribe / अमानुएन्सिस) थे।
प्राचीन समय में जब पॉल किसी पत्र को लिखते थे, तो वे अक्सर किसी प्रशिक्षित लेखक को अपना संदेश बोलकर उसे पन्नों पर उतारने को कहते थे। ऐसे में उस लिखने वाले व्यक्ति की पहचान के रूप में वह अपना नाम अंत में जोड़ देता था — बिल्कुल जैसे टर्टियस ने किया।
निष्कर्ष:
यह बात बाइबल‑विद्वानों में सामान्य समझ है कि पॉल की प्रेरणा, उद्देश्य और शब्द ही मुख्य हैं, और टर्टियस केवल उसे रिकॉर्ड करने में मदद कर रहे थे, न कि संदेश का मूल
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