प्रभु यीशु ने हमें एक ऐसा उत्तम प्रार्थना-पाठ सिखाया जो हर आवश्यक बात को समेटता है — “हे हमारे पिता जो स्वर्ग में है…”
उसमें एक अत्यन्त गहरा वचन है:
“तेरा राज्य आए।” (मत्ती 6:10)
क्या तुमने कभी सोचा है कि यीशु ने हमें क्यों सिखाया कि हम परमेश्वर के राज्य के आने की प्रार्थना करें?
यह इसलिए है क्योंकि परमेश्वर का राज्य अभी पूरी रीति से प्रकट नहीं हुआ है।
इस संसार में अनेक राज्य, राष्ट्र और शक्तियाँ हैं, जो एक-दूसरे से बड़ा और श्रेष्ठ बनने का प्रयास करती हैं।
पर यदि हम सब एक ही पूर्वज — आदम — से उत्पन्न हुए हैं, तो फिर इतने अलग-अलग राज्य क्यों हैं?
क्यों एक ही शासक पूरी पृथ्वी पर शासन नहीं करता?
इसका उत्तर एक प्राचीन आध्यात्मिक संघर्ष में छिपा है — जो स्वर्गीय राज्य और शैतान के विद्रोही राज्य के बीच प्रारम्भ हुआ।
स्वर्ग का राज्य और शैतान का विद्रोह
पृथ्वी की सृष्टि से पहले परमेश्वर ने स्वर्ग में एक पवित्र और व्यवस्थित राज्य स्थापित किया।
बाइबल कहती है:
“आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” (उत्पत्ति 1:1)
स्वर्ग में परमेश्वर की उपस्थिति थी, और वहाँ दूतगण निवास करते थे —
उनमें से एक था लूसिफर, एक सुन्दर और बुद्धिमान करूब (देखो यहेजकेल 28:12–14)।
लूसिफर को परमेश्वर ने आराधना और महिमा के कार्य के लिए बनाया था।
परंतु उसके हृदय में अहंकार उत्पन्न हुआ।
वह अपनी ही सुन्दरता और बुद्धि से भर गया, और उसने कहा:
“मैं स्वर्ग पर चढ़ूँगा; मैं अपना सिंहासन परमेश्वर के तारों से ऊपर रखूँगा;
मैं परमप्रधान के समान बनूँगा।”
— यशायाह 14:13–14
यह अभिमान उसका पतन बना।
उसने बहुत से स्वर्गदूतों को अपने साथ विद्रोह में मिला लिया।
पर परमेश्वर ने उसे तुरंत नीचे गिरा दिया:
“मैं ने शैतान को स्वर्ग से बिजली के समान गिरते देखा।”
— लूका 10:18
वह एक ही क्षण में स्वर्ग से बाहर निकाल दिया गया।
इस प्रकार, वह अंधकार का राज्य लेकर पृथ्वी पर आया।
भविष्यवाणी में पतन का वर्णन
भविष्यद्वक्ता यहेजकेल लिखते हैं:
“तू अदन, अर्थात् परमेश्वर के बाग में था…
तू अपनी सृष्टि के दिन से निर्दोष था,
जब तक तुझ में अधर्म न पाया गया।”
— यहेजकेल 28:13–16
और यशायाह कहता है:
“हे भोर के पुत्र लूसिफर, तू स्वर्ग से कैसे गिर पड़ा!
तू जो जातियों को दुर्बल करता था, तू भूमि पर गिराया गया।”
— यशायाह 14:12
यह उस अद्भुत प्राणी का पतन था जो कभी महिमा में चमकता था, पर अब अनन्त अपमान में है।
पृथ्वी पर मनुष्य का पतन
परमेश्वर ने पृथ्वी को मनुष्य के अधीन रखा:
“हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाएं, ताकि वह पृथ्वी पर अधिकार करे।”
— उत्पत्ति 1:26
ईश्वर ने आदम को एक छोटा “राजा” बनाकर अदन के बाग में रखा।
परन्तु शैतान ने उसे छल से गिरा दिया।
पाप के कारण मनुष्य ने अपनी प्रभुता खो दी, और शैतान “इस संसार का प्रधान” कहलाया (यूहन्ना 12:31)।
यही कारण है कि शैतान ने यीशु से कहा:
“यह सब राज्य और उनका वैभव मैं तुझे दूँगा, क्योंकि यह मुझे सौंपा गया है।”
— लूका 4:6
यह पृथ्वी अब अस्थायी रूप से उसके नियंत्रण में है, पर उसका अंत निश्चित है।
शैतान का अन्त और आनेवाला न्याय
शैतान जानता है कि उसका समय बहुत थोड़ा है (प्रकाशितवाक्य 12:12)।
इसलिए वह उसी अभिमान और विद्रोह को मनुष्यों में फैलाता है जिसने उसे गिराया था।
लेकिन जैसे उसका पहला पतन अचानक हुआ, वैसे ही उसका अन्त भी अचानक होगा।
“जब वे कहेंगे, ‘शान्ति और सुरक्षा’, तब उन पर अचानक विनाश आ पड़ेगा।”
— 1 थिस्सलुनीकियों 5:3
आज दुनिया विज्ञान, शक्ति और एकता की बात करती है, परन्तु परमेश्वर से दूर है।
जैसे बाबुल का राज्य एक ही रात में नष्ट हो गया, वैसे ही शैतान का राज्य भी एक ही क्षण में गिर पड़ेगा।
“मने, मने, तेकेल, परसिन।”
— दानिय्येल 5:25
मसीह का अनन्त राज्य
जब सातवाँ नरसिंग फूँका जाएगा, तो स्वर्ग में यह घोषणा होगी:
“संसार के राज्य हमारे प्रभु और उसके मसीह के राज्य हो गए हैं,
और वह युगानुयुग राज्य करेगा।”
— प्रकाशितवाक्य 11:15
उस दिन अंधकार का साम्राज्य समाप्त होगा और मसीह की ज्योति सदा के लिए राज्य करेगी।
इसलिए, हे भाई और बहन —
इस संसार की चमक से धोखा मत खाना, क्योंकि इसका वैभव क्षणिक है।
परन्तु परमेश्वर का राज्य सदा बना रहेगा।
“पहले उसके राज्य और धर्म की खोज करो,
तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी।”
— मत्ती 6:33
सावधानी और तैयारी का आह्वान
सावधान रहो!
शैतान का पतन बिजली की तरह होगा।
जो मसीह में हैं, वे उसके साथ राज्य करेंगे।
“जो आनेवाला है, वह शीघ्र ही आएगा और देर नहीं करेगा।”
— इब्रानियों 10:37
अपने हृदय को तैयार करो, पवित्रता में चलो, और परमेश्वर के राज्य का प्रचार करो — ताकि बहुत से लोग अंधकार के राज्य से निकलकर मसीह की ज्योति में प्रवेश करें।
प्रभु तुम्हें आशीष दे और यीशु मसीह के आगमन के लिए तैयार करे। आमीन।
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