1. पुष्टि का अर्थ क्या है?
“पुष्टि” का अर्थ है दृढ़ किया जाना या स्थापित होना। कुछ मसीही परंपराओं—जैसे कैथोलिक, ऑर्थोडॉक्स और एंग्लिकन चर्च—में इसे एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है।
उदाहरण के लिए, कैथोलिक चर्च सात संस्कार सिखाता है, और उसके अनुसार कोई व्यक्ति तभी पूरी तरह परमेश्वर के सामने स्वीकार होता है जब वह बपतिस्मा लेने के बाद पुष्टि भी ग्रहण कर ले।
इन चर्चों में बपतिस्मा के बाद व्यक्ति को शिक्षा दी जाती है, और फिर एक बिशप उसके ऊपर हाथ रखता है। ऐसा माना जाता है कि इस हाथ रखने से पवित्र आत्मा उस व्यक्ति पर उतर आता है—जैसा कि प्रारंभिक कलीसिया में हुआ था।
प्रेरितों के काम 8:14–17 (ERV-Hindi)
“यरूशलेम में रहने वाले प्रेरितों ने जब सुना कि सामरिया ने परमेश्वर का वचन ग्रहण कर लिया है, तब उन्होंने पतरस और यूहन्ना को उनके पास भेजा। वे वहाँ पहुँचे और उन्होंने उनके लिये प्रार्थना की कि वे पवित्र आत्मा प्राप्त करें। क्योंकि पवित्र आत्मा उन में से किसी पर भी नहीं उतरा था। वे केवल प्रभु यीशु के नाम पर बपतिस्मा लिये हुए थे। तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्हें पवित्र आत्मा मिल गया।”
कुछ लोग इस खण्ड का प्रयोग यह कहने के लिए करते हैं कि पवित्र आत्मा पाने के लिए हाथ रखना आवश्यक है।
2. क्या पुष्टि (Confirmation) बाइबिल का सिद्धांत है?
बाइबल बार-बार सिखाती है कि विश्वास बपतिस्मा से पहले आता है।
बपतिस्मा एक व्यक्ति के पश्चाताप और यीशु पर भरोसे की सार्वजनिक गवाही है।
क्योंकि शिशु न तो पश्चाताप कर सकते हैं और न ही विश्वास, इसलिए शिशु-बपतिस्मा बाइबिल की स्पष्ट शिक्षा से मेल नहीं खाता।
रोमियों 10:13–15 (ERV-Hindi)
“क्योंकि ‘जो कोई प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पाएगा।’ फिर जिस पर उन्होंने विश्वास ही नहीं किया, उसका नाम वे कैसे लेंगे? और जिसका संदेश उन्होंने सुना ही नहीं उस पर वे कैसे विश्वास करेंगे? और कोई प्रचार करने वाला ही न हो तो वे सुनेंगे कैसे?…”
इसलिए बपतिस्मा लेने से पहले व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास और सुनकर समझना आवश्यक है।
3. पवित्र आत्मा और हाथ रखने का सिद्धांत
प्रेरितों ने कभी यह नहीं सिखाया कि पवित्र आत्मा केवल हाथ रखने से ही प्राप्त होता है।
प्रेरितों के काम 8 केवल एक विशेष परिस्थिति है जिसमें पवित्र आत्मा ने ऐसा करवाया।
लेकिन बाइबल में कई उदाहरण हैं जहाँ पवित्र आत्मा बिना किसी के हाथ रखे उतरा:
(1) पिन्तेकुस्त का दिन — प्रेरितों के काम 2:1–4
विश्वासी बस प्रार्थना में एक-दिल होकर बैठे थे और पवित्र आत्मा स्वयं उन पर उतर आया।
(2) कुरनेलियुस का घर — प्रेरितों के काम 10:44–45 (ERV-Hindi)
“जब पतरस ये बातें कह ही रहा था कि इन वचनों को सुनने वाले सब लोगों पर पवित्र आत्मा उतर आया। पतरस के साथ आए हुए खतना किए हुए विश्वासी यह देखकर अचंभित हुए कि पवित्र आत्मा का वरदान अन्यजातियों पर भी उँडेल दिया गया है।”
यहाँ भी किसी ने हाथ नहीं रखा, फिर भी वे पवित्र आत्मा से भर गए।
पतरस की स्पष्ट शिक्षा — कैसे मिलता है पवित्र आत्मा?
प्रेरितों के काम 2:38 (ERV-Hindi)
“पतरस ने उनसे कहा, ‘मन फिराओ और अपने पापों की क्षमा के लिये तुम में से प्रत्येक अपने को यीशु मसीह के नाम पर बपतिस्मा दो। तब तुम पवित्र आत्मा का वरदान पाओगे।’”
पतरस ने हाथ रखने को कभी आवश्यक नहीं बताया।
4. आज के लिए व्यावहारिक सीख
आज कुछ चर्च इस तरह की पुष्टि, अभिषेक या अन्य रीतियों को परमेश्वर द्वारा स्वीकार किए जाने की शर्त बना देते हैं।
लेकिन बाइबल का ज़ोर किसी परंपरा या संस्कार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के सच्चे विश्वास, पश्चाताप और आज्ञाकारिता पर है।
बहुत से लोग बपतिस्मा और पुष्टि तो ले लेते हैं, पर:
- पवित्र आत्मा कौन है,
- उद्धार क्या है,
- और पवित्र जीवन कैसे जीना है—
इन बातों की बाइबिलीय समझ उनके पास नहीं होती।
यही कारण है कि केवल रीतियाँ निभा लेने से आत्मिक जीवन में परिवर्तन नहीं आता।
5. निष्कर्ष
पुष्टि बाइबिल का आदेश नहीं है।
यह चर्च-परंपराओं द्वारा विकसित किया गया एक धार्मिक अभ्यास है।
बाइबल साफ़ सिखाती है कि:
- उद्धार,
- पापों की क्षमा,
- और पवित्र आत्मा का वरदान
व्यक्तिगत विश्वास, पश्चाताप और यीशु मसीह के नाम में बपतिस्मा से मिलता है—न कि किसी बिशप के हाथ रखने या तेल से अभिषेक किए जाने से।
ये परंपराएँ कुछ लोगों के लिए अर्थपूर्ण हो सकती हैं, पर इन्हें उस सरल और स्पष्ट सुसमाचार का स्थान कभी नहीं लेना चाहिए जिसे परमेश्वर ने हमें दिया है
परमेश्वर आपको आशीष दे। उसके वचन को निष्ठा से खोजते रहें—वही आपको सत्य और जीवन की राह दिखाएगा।
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